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बत्तख

पक्षी उड़ान के लिए अनुकूलित कशेरुक हैं।



अगर हमे रोज , सुबह-शाम पक्षियों की बोली , उनका मधुर संगीत सुनाई नही दे , तो हमारा जीवन कितना नीरस हो जाएगा | प्रकृति और हमारे आसपास का वातावरण कितना सुनसान और भयावह लगेगा | सदियों से पक्षी और मनुष्य साथ साथ रहे है | गौरैया , कौआ , चील , गिद्ध , मोर ,मुर्गी , बुलबुल , कोयल आदि कई पक्षियों से हम परिचित है जो हमारे आसपास ही रहते है लेकिन ऐसे सैंकड़ो पक्षी है जिन्हें हमने देखा नही है और उनके बारे में हम बहुत कम जानते है | ऐसे ही अनोखे पक्षियों से जुड़े रोचक तथ्य बताते है |

पक्षी उड़ने वाले जीव हैं । ये आसमान में पंख फैलाकर उड़ते हैं तो आकर्षक दृश्य उपस्थित हो जाता है । प्रभात और सायंकाल में इनकी किलकारी से धरती गुंजित हो उठती है । इनके निवास से वन-प्रांतों की शोभा निखर उठती है । इनके आकर्षक रंगों से हर कोई मोहित हो जाता है ।

पक्षी हैं ही बड़े अजीब । कोई काला, कोई हरा तो कोई जामुनी । इनका हल्का शरीर इन्हें उड़ने में मदद करता है ।


इनके पंख हल्के तथा रंग-बिरंगे होते हैं । इनके दो पैर और दो आँखें होती हैं । पैरों की सहायता से ये धरती पर विचरण करते हैं । कुछ पक्षी आकाश में अत्यंत ऊंचाई पर उड़ते हैं तो कुछ मात्र दो-चार फुट का फासला ही तय कर पाते हैं । जिस प्रकार संसार में अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ पायी जाती हैं, उसी प्रकार पक्षी जगत् में भी अनेक प्रकार की विभिन्नताएँ पायी जाती हैं । परंतु दो विशेषताएँ तो सबमें समान हैं-एक तो ये उड़ सकते हैं, दूसरा यह कि सभी पक्षी अंडे देते हैं ।

पक्षी प्रकृति से गहराई से जुड़े होते हैं । ये जंगलों में, झाड़ियों में तथा वृक्षों पर घोंसला बनाकर रहते हैं । जहाँ थोड़ी सी हरियाली देखी वहीं बसेरा बना लिया । खर-पतवार इकट्‌ठा किया, तिनका-तिनका जोड़ा और घोंसला बना लिया । कुछ पक्षी तो घोंसला बनाने में बहुत निपुण होते हैं, जैसे कि बया पक्षी का घोंसला । इनके घोंसले की बनाव

देखते ही बनती है । कुछ पक्षी घोंसला न बनाकर पेड़ की कोटर में आशियाना बना लेते हैं । कठफोड़वा पक्षी काठ में


छिद्र बना लेता है । मोर जैसे कुछ बड़े पक्षी घोंसला न बनाकर झाड़ियों में शरण लेते हैं ।

कुछ पक्षियों का मृदुल स्वर हमें आकर्षित करता है । कोयल, पपीहा, तोता आदि पक्षियों की सुमधुर ध्वनि के सभी कायल हैं । साहित्य में इनके स्वर की बड़ी चर्चा है । कवि की रचनाओं में इनका बहुत गुणगान है । पर कुछ पक्षियों की बोली कर्कश मानी जाती है । कहा भी गया है कि कोयल किसे क्या देता है और कौआ किससे क्या लेता है, पर कौए की कर्कश बोली के कारण सब उसे नापसंद करते हैं ।

यों तो पक्षी आजाद रहना चाहते हैं पर कुछ पक्षियों को मनुष्य पालतू बना कर रखता है । कबूतर, तोता, मुर्गा जैसे पक्षियों को पालतू बनाया जा सकता है । तोता तो अनेक घरों में विराजमान है । यह मनुष्य की आवाज की नकल निकाल सकता है । इसे पिंजड़े में रखा जाता है । कबूतर को शांति का प्रतीक माना जाता है । मुर्गा या मुर्गीपालन व्यवसायिक दृष्टि से बहुत महत्त्व रखता है । इनसे अंडा एवं मांस प्राप्त किया जाता है । कबूतरों का प्रयोग संदेशवाहक के रूप में किया जाता है । ये कुशल डाकिए माने जाते हैं ।

गरुड़ या बाज पक्षियों का राजा कहलाता है । धार्मिक साहित्य तथा पुराणों में इनका वर्णन मिलता है । ये बड़े शक्तिशाली होते हैं । आसमान में बहुत ऊँचाई से अपने शिकार के देख लेते हैं । अपने शिकार पर ये तेजी से झपट पड़ते हैं ।

पक्षी उड़ान के लिए अनुकूलित कशेरुक जानवर हैं।

 कई लोग दौड़ भी सकते हैं, कूद सकते हैं, तैर सकते हैं और गोता लगा सकते हैं।  कुछ, जैसे पेंगुइन, उड़ने की क्षमता

खो चुके हैं, लेकिन अपने पंखों को बनाए रखा है।  पक्षी दुनिया भर में और सभी आवासों में पाए जाते हैं।  सबसे बड़ा नौ फुट लंबा शुतुरमुर्ग है।  सबसे छोटा दो इंच लंबा मधुमक्खी चिड़ियों का बच्चा है।

 एक पक्षी की शारीरिक रचना के बारे में सब कुछ उड़ान भरने की उसकी क्षमता को दर्शाता है।  उदाहरण के लिए, पंखों को लिफ्ट बनाने के लिए आकार दिया गया है।  अग्रणी किनारा पिछले किनारे की तुलना में मोटा है, और वे पंखों में ढंके हुए हैं जो एक बिंदु तक संकीर्ण हैं।  हवाई जहाज के पंखों को पक्षी के पंखों के बाद तैयार किया जाता है।

 विंग की हड्डियां और मांसपेशियां भी अत्यधिक विशिष्ट हैं।  मुख्य हड्डी, ह्यूमरस, जो स्तनपायी की ऊपरी भुजा के समान है, ठोस के बजाय खोखला होता है।  यह पक्षी के वायु थैली प्रणाली से भी जुड़ता है, जो बदले में, उसके फेफड़ों से जुड़ता है।  कंधे की शक्तिशाली उड़ान की मांसपेशियां कील से जुड़ी होती हैं, हड्डी का एक विशेष रिज जो चौड़ा उरोस्थि, या ब्रेस्टबोन के केंद्र को चलाता है।  पूंछ के पंखों का उपयोग स्टीयरिंग के लिए किया जाता है।



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